! !

तुम कहाँ हो....


कहाँ तो तुम
देख रही हो न
वेदना, 
असहाय प्रयास
धीरे धीरे 
समाप्त होता जीवन,
खत्म होती जिजीविषा, 
एकाकी होते रिश्ते, 
धूमिल होते नाते,
तुम देख रही हो न माँ....

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