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रुलाया नहीं करते


वेबजह घर से यूँ जाया नहीं करते
मां को अपनी रुलाया नहीं करते।

उदास है, चिंतित है सब यहां 
रिश्तों को यूं पराया नहीं करते ।

बहने देखे रंगों और राखी को एकटक
बिन अपनो के उत्सव भाया नहीं करते। 

भर जाती है रौनके तुम्हारी  मुस्कराहटों से 
लुकाछिपी से अपनों को सताया नहीं करते ।

बदरंग, दोगली, अहसानफरामोश  है ये दुनिया
राह चलते को कभी मेहमान बुलाया नहीं करते । 

1 COMMENTS:

Digamber Naswa on 5 मार्च 2018 को 8:05 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

वाह ...
माँ को यूँ रुलाया नहीं करते ... हर शेर अलग अन्दाज़ का लाजवाब ...

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