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मंगलवार, अक्तूबर 17

व्यापार। लघुकथा


- दस और पचास का स्टाम्प पेपर तो दीजिये।
- दस और पचास के तो नहीं है बीस और सौ के ही आ रहे है।
- जरूरत तो दस और बीस की ही थी। इसमें तो रुपये ज्यादा लग जाएंगे।
- जनाब यही है। इस बाहने दो पैसे हमारे भी बन जाएंगे। 
- अरे शर्मा जी, "ईश्वर से तो डरिये अगले जन्म में लंगड़ी खच्चर बनोंगे"।
आस पास के लोग ठहाके लगा रहे थे और आस्था हवा में बिखरी पड़ी थी।

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