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कैसी दिवाली कैसी होली


कैसी दिवाली कैसी होली
धूमिल रौशनी फीकी रंगोली
कुछ पास कुछ बहुत दूर
दूषित है अपनों की बोली
कैसा प्रेम कहाँ का नाता
बहरूपियों ठगों की टोली
हवाओं में अजब सन्नाटा
ज़हर भरी कुटिल ठिठोली
कैसे खेलूं कंच्चे गिली डंडा
खो गए है प्रिय हमजोली
जड़े गहरी है वर्गभेद की 
कौन समझेगा मेरी बोली

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