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बुधवार, अगस्त 22

जिजीविषा हार गई


जिजीविषा
हार गई
वो सह नहीं पाई
निरन्‍तर दौड़ना
प्रतीक्षा करना
डायलसिस की वेदना
अनावश्‍यक डांट
जिजीविषा 
सह गई
अमानवीय व्‍यवहार
और
यम
जीत गया,
जिजीविषा
हार गई
और सो गई
सदा के लिए।





3 COMMENTS:

Ashwini Ramesh on 22 अगस्त 2012 को 10:56 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

जब तक साँस तब तक आस !इस कविता के पात्र का देहांत हो गया ,ऐसा लगता है !

S.N SHUKLA on 27 अगस्त 2012 को 9:28 am ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates


बहुत सुन्दर प्रस्तुति, सादर.

मेरे ब्लॉग की नवीनतम पोस्ट पर आपका स्वागत है .

संध्या शर्मा on 9 जनवरी 2013 को 1:28 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

बहुत तकलीफदायक होती है डायलिसिस की वेदना, शायद उसे इस चिरनिद्रा से ही आराम मिलता... अपनी माँ को देखा है बहुत करीब से इस वेदना से जूझते और हार कर सोते...मार्मिक प्रस्तुति... आभार

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