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तानु जुब्‍बड़ मेला 30 मई



                                                                                                       शिमला जिला में नारकंडा ब्लाक के तहत ग्राम पंचायत जरोल में स्थित तानु जुब्बढ़ झील एक सुंदर पर्यटक स्थल है। यहाँ नाग देवता का प्राचीन मन्दिर हैं ! यह झील नारकंडा से 9 किलो मीटर दूर समुद्रतल से 2349 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ! इस झील का एक पुरातन इतिहास रहा है ! इतनी ऊंचाई पर समतल मैदान के बीचो बीच आधा किलोमीटर के दायरे लबालब पानी से भरी इस झीलं को देख कर हर कोई सोच में पड़ जाता है ! जुब्बढ़ का स्थानीय भाषा में अभिप्राय है घास का मैदान ! इस झील की खोज का श्रेय उन भेड़ बकरी पलकों को जाता है जो यहाँ भेड़ और बकरियों को यहाँ चराने आते थे ! समतल मैदान होने के कारण इन पशु पालकों ने यहाँ पर खेती करने की सोची ! खेती करते समय उन पशु पालकों को यहाँ ठंडे इलाके के बाबजूद सांप नज़र आते थे ! वे उन साँपों को मरने का प्रयास करते तो वो वही पर लुप्त हो जाते थे ! इतना होने पर भी वे पशु पालक वहां पर खेती करते रहे ! एक दिन खेती करते समय एकाएक 18 जोड़ी बैल मैदान के मध्य छिद्र हो जाने से वहा उत्पन हुई जलधारा में समां गए ! इस जलधारा से मैदान पानी से पूरा भर गया ! मान्यता है की इस दृश्य को देखने वाले अभी हैरान परेशां ही थे की वहा नाग देवता जी की प्रतिमा उभर आई ! लोगों ने इसे देव चमत्कार मानते हुए नाग देवता की स्थापना यहाँ कर दी ! आज भी नाग देवता का मंदिर यहाँ पर आलोकिक है और लोगो में बेहद मान्यता है !

उस समय उस चमत्कार में गायब हुए चरवाहे औए बैल सैंज के समीप केपु गाँव में निकले ! यह सब केसे हुआ इसे देव चमत्कार ही माना जाता है !इसके प्रमाण आज भी केपु के मंदिर में देखे जा सकते है !
हर वर्ष यहाँ पर मई मास में 31तारीख के आस पास मेले का आयोजन किया जाता है जो की लगभग तीन दिनों तक चलता है इस मेले में चतुर्मुखी देवता मेलन मेले की शोभा बढाते है ! इस मेले में दूर दूर से श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते है ! स्थानीय स्थाई निवासी इस मेले में ज़रूर शिरकत करते है। झील के चारो ओर देवदार के वृक्ष इस स्थल की सुन्दरता को और भी बढ़ा देते है ! ठंडी ठंडी हवा वातावरण को और भी सुहावना बना देती है ! इस मेले में खेल कूद प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है जिसमें वोल्ली बाल क्रिकेट इत्यादि प्रतियोगिता प्रमुख है !
कुछ भी कहा जाये परन्तु आज भी पुरातन काल में हुए इन चमत्कारों के प्रमाणों को देख कर लोग चकित रह जाते है ! इस क्षेत्र का प्राकृतिक सोंदर्य अद्भुत तो है ही और पर्यटकों को आकर्षित भी करता है ! आवश्यकता है इस क्षेत्र को और अधिक विकसित करने की क्योंकि यहाँ पर्यटन की आपार संभावनाएं है !

7 COMMENTS:

डॉ॰ मोनिका शर्मा on 29 मई 2011 को 9:45 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

Bahut Sunder Jankari...

Atul Shrivastava on 30 मई 2011 को 11:59 am ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

आपके ब्‍लाग में आकर अच्‍छा लगा।

लिंक देने के लिए शुक्रिया।
अच्‍छी और प्रेरक जानकारी।
लगता है दोबारा शिमला आना होगा

aarkay on 30 मई 2011 को 12:20 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

यों किन्नौर में अपने सेवा काल के दौरान नारकंडा हो कर अनेकों बार आना जाना हुआ है परन्तु जानकारी के अभाव में इस सुरम्य स्थान को देखने से वंचित रह गया.
इस रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आभार !

Patali-The-Village on 30 मई 2011 को 6:23 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

बहुत सुन्दर जानकारी के लिए धन्त्वाद|

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार on 4 जून 2011 को 7:20 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

आदरणीय रौशन जसवाल विक्षिप्त जी
सादर अभिवादन !

तानु जुब्बढ़ झील एवं नाग देवता के प्राचीन मन्दिर के बारे में जानना बहुत रोचक रहा ।
आपके ब्लॉग की कई पुरानी पोस्ट्स पढ़ कर भी आनन्दित हुआ …

हृदय से आभार स्वीकार करें ।

हार्दिक शुभकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार on 4 जून 2011 को 7:20 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

कृपया ,
शस्वरं
पर आप सब अवश्य visit करें … और मेरे ब्लॉग के लिए दुआ भी … :)

शस्वरं कल दोपहर बाद से गायब था …
हालांकि आज सवेरे से पुनः नज़र आने लगा है …
लेकिन आज भी बार-बार मेरा ब्लॉग गायब हो'कर उसके स्थान पर कोई अन्य ब्लॉग रिडायरेक्ट हो'कर खुलने लग जाता है …

कोई इस समस्या का उपाय बता सकें तो आभारी रहूंगा ।

डॉ० डंडा लखनवी on 7 जून 2011 को 4:53 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

rocak jankaree ke liye dhanyavad.

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