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मंगलवार, जून 15

चार प्रमुख तीर्थ


सनातन धर्मावलंबियों के लिए देवभूमि उत्तराखंड के चार प्रमुख तीर्थ - गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ के कपाट खुलने के साथ ही पावन धामों की वार्षिक यात्रा वैशाख मास यानि मई माह में आरंभ होती  है। चार धाम यात्रा के लिए गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट इस वर्ष ग्रीष्म काल के लिए अक्षय तृतीया के पुण्य दिन पर 16 मई को, केदारनाथ के 18 मई तथा बद्रीनाथ के कपाट 19 मई को खुले !  इन चार धामों की यात्रा पहले की तरह दुर्गम नहीं रह गई है। तीर्थयात्री धार्मिक महत्व के अनुसार चार धाम में सबसे पहले यमुनोत्री, गंगोत्री जाते हैं। उसके बाद केदारनाथ और आखिर में बद्रीनाथ की यात्रा का पुण्य लाभ लेते हैं। चार धामों की इस यात्रा में देश-विदेश से लाखों की संख्या में तीर्थयात्री शामिल होते हैं। अब यह यात्रा नौ से दस दिन में ही पूरी हो जाती है। अनेक तीर्थयात्री कुंभ मेले में शामिल होकर चार धाम की यात्रा के लिए कपाट खुलने से पहले ही पहुंच गए।  चार धामों की ऊंचाई लगभग ३ हज़ार  मीटर है। इन चार धामों की यात्रा की शुरुआत प्रमुख रुप से तीर्थ नगरी हरिद्वार से गंगा स्नान के साथ होती है। यहां से चार धामों की यात्रा का दायरा लगभग १५ सौ  किलोमीटर है। सरकारी नियमों के अनुसार चार धाम की यात्रा दस दिन, तीन धाम की यात्रा आठ दिन, दो धाम की यात्रा छ: दिन और एक धाम की यात्रा एक दिन में पूरी हो जाना चाहिए। हालांकि वर्तमान में टिहरी बांध के निर्माण के बाद से यमुनोत्री और गंगोत्री धाम की दूरी लगभग २० से २५ किलोमीटर ज्यादा हुई है। किंतु पूर्व की तुलना में यमुनोत्री तक पहुंचने का सड़क मार्ग अब लगभग १० किलोमीटर कम हो गया है। पहले जहां बस या निजी वाहन हनुमान चट्टी तक ही पहुंच पाते थे, किंतु सड़क निर्माण के बाद यह जानकी चट्टी तक चले जाते हैं। जिससे अब यात्रा में अब लगभग चार या पांच किलोमीटर ही पैदल चलना होता है, जो पूर्व मे लगभग १५ किलोमीटर तक पैदल मार्ग था। इसके कारण चार धाम की यात्रा में भी एक या दो दिन की बचत हो जाती है। गंगोत्री तक भी सड़क मार्ग बना है। केदारनाथ की यात्रा की शुरुआत गौरीकुंड से होती है। यह यात्रा लगभग १५ से २० किलोमीटर की पैदल यात्रा है। बद्रीनाथ धाम की यात्रा तुलनात्मक रुप से सुविधाजनक है। प्रशासनिक स्तर पर चार धाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए हर स्तर पर अच्छी  व्यवस्था की जाती है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए भी आपातकालीन सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं। यात्रियों को सभी मूलभूत सुविधाएं जैसे आवागमन, वाहन व्यवस्था, रहने, ठहरने, खान-पान, जल, चिकित्सा, नित्यकर्मों के लिए सुलभ स्थानों की पूरी व्यवस्था सरकार और स्थानीय धार्मिक सेवा संस्थाओं की ओर से की जाती है। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजूर्गों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाता है। अधिक मास के कारण इस वर्ष यह तीर्थ यात्रा घटकर पांच माहों की रह गई है। चार धाम यात्रा के लिए हरिद्वार पहुंचने के लिए भारत के सभी प्रमुख शहरों से रेल, सड़क, वायु मार्ग से आवागमन के साधन उपलब्ध है।

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