! !

शुक्रवार, जुलाई 17

नागों की उत्पत्ति


हिमालयी क्षेत्रों का दामन नागों से भरा पड़ा है। लेकिन इसमें कुल्लू का अहम भूमिका रही है। कुल्लू में इन नागों की पूजा की जाती है। कुल्लू से ही नागों की उत्पत्ति मानी गई है। पश्चिमी हिमालयी की नाग परंपरा शोध प्रबंध में तो हिमालयी क्षेत्रों से निकलने वाली नदियों की उत्पत्ति नागों से ही मानी गई है। जम्मू कश्मीर व उत्तराखंड में तो नागों के नाम पर चश्में व झीलें भी है। नाग वन, नागा का सौर, नगवांई आदि मुख्य हैं। जड़ी-बूटि का नाम नागकेसर व बेल का नाम नागरबेल है। विद्वानों का वर्ग दक्षिण के नागपुर को भी नागों द्वारा बसाया हुआ मानते हैं। हिंदुओं में 360 देवता माने गए हैं। कुल्लू में भी देवी-देवताओं की संख्या 360 ही है। इनमें नागों की संख्या भी काफी है। नागों के राजा वासुकि नाग की उत्पत्ति नग्गर स्थित हलाण गांव से मानी जाती है। कुल्लू के अठारह नागों के भांदल आज भी गोशाल गांव में हैं। घाटी के देवता जब भी पवित्र स्नान के लिए वशिष्ठ जाते हैं तो भांदल को सम्मान देते हैं। नागों के राजा वासुकि के वंश को जन्म देने का सम्मान भी कुल्लू को ही है। कुल्लू में माहुटी नाग, मणिकर्ण में रूद्र नाग, औटर सराज में चंभू नाग, कतमोरी नाग, रामगढ़ कंढ़ी का नात्री नाग, रामपुर बुशहर में 9 नाग, मंडी का मांहुनाग, सिराज की बूढ़ी नागिन, नूरपुर की नागणी आदि प्रसिद्ध है। इनके मंदिर भी हैं और जहां हर साल मेले भी आयोजित होते हैं। जिले में अठारह नाग हैं। हैरिटेज विलेज नग्गर में तो नागों के नाम पर नग्गर नगेड़ का आयोजन होता है। जहां धान की पराली का लंबा नाग बनाया जाता है। उसके टुकड़े-टुकड़े करके हारियान उससे नाचते हैं। हरिवंश पुराण में हिमालय को पहाड़ों का राजा, पीपल को वृक्षों का राजा व वासुकि नाग को नागों का राजा माना गया है। लाल चंद प्रार्थी की बहुचर्चित पुस्तक ‘कुलूत देश की कहानी’ में नागा आदिवासी का संबंध भी नागों से ही माना गया है। कांगड़ा, कुल्लू व कश्मीर में नाग ब्राmणों की एक ऊं ची जाति आज भी मौजूद हैं। कुल्लू से ही नाग परंपरा की उत्पत्ति हुई है। गोशाल गांव में आज भी अठारह नागों के वंश मौजूद हैं।

3 COMMENTS:

Murari Pareek on 24 जुलाई 2009 को 5:29 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

बहुत अच्छी जानकारी दी नागों की उत्पति के बारे में, नागालैंड शायद नाग से सम्बंधित नहीं है वो लोग पहले वस्त्र नहीं पहनते थे इसलिए उन्हें नागा के नाम से जाना जाता है !!

‘नज़र’ on 24 जुलाई 2009 को 7:18 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

लेख बहुत ज्ञानवर्धक है!
---
विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

PN Subramanian on 24 जुलाई 2009 को 10:43 pm ने कहा… Best Blogger Tips[Reply to comment]Best Blogger Templates

बहुत अच्छी जानकारी है. पूरे भारत में ही नहीं बल्कि सुदूर पूर्व में कम्बोडिया, थाईलैंड आदि देशों में भी ऐसी परम्पराएँ हैं

एक टिप्पणी भेजें

" आधारशिला " के पाठक और टिप्पणीकार के रूप में आपका स्वागत है ! आपके सुझाव और स्नेहाशिर्वाद से मुझे प्रोत्साहन मिलता है ! एक बार पुन: आपका आभार !

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

लेखा जोखा



आपके पधारने के लियें धन्यवाद Free Hit Counters

Creative Commons License
This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivs 3.0 Unported License.
 
ब्लोगवाणी ! चिठाजगत ! INDIBLOGGER ! BLOGCATALOG ! हिंदी लोक ! NetworkedBlogs ! INDLI ! VOICE OF INDIANS हिंदी टिप्स ! हिमधारा ! ऐसी वाणी बोलिए ! हिमाचली ब्लोगर्स ! हिंदी ब्लोगों की जीवनधारा ! ब्लोगर्स ट्रिक्स !

© : आधारशिला ! THEME: Revolution Two Church theme BY : Brian Gardner Blog Skins ! POWERED BY : blogger