! !

पहाड़ चुप है

0 COMMENTS
शहर
गमलों से निकल कर
निहार रहा है पहाड़ो को,

पहाड़
उदास है
गमगीन है
क्योंकि
वो जानता है
स्तिथियाँ बदल जाएगी
एक अंतराल के बाद
वो रह जायेगा एकाकी,

पहाड़ जानता है
ये प्रसन्नताएँ उल्हास
ये मन्त्रणाएँ
क्षणिक है
खो जाएगा ये सब
कहीं सुदूर
और
इन्ही गमलों में
खो जाएगा शहर
 पहाड़ चुप है
हमेशा की तरह।

गुलदस्ता

0 COMMENTS
कुछ  दिन पूर्व गमलों के लिए फूल के पौधें लाया था। मोल भाव करने के बाद पांच पौधें लिए। पौधे वाला कहने लगा, भाई साहब इन्हें इक्कठे एक ही गमले में लगाना। गुलदस्ता बनेगा तो अच्छा लगेगा। 
पौधे वाले कि बात मानते हुए सभी पौधे एक ही गमले में लगा दिए।
आज चेक किया तो एक पौधा सूख गया था। न चाहते हुए भी उसे उखाड़ना पड़ा। 
और फैंक दिया कूड़ेदान में ... ।

मुर्गा

0 COMMENTS
एक दड़वा। कुल चार मुर्गे। चार छोटे एक बड़ा। बड़ा मुर्गा इन चार छोटे मुर्गों की देखभाल करता, बाहरी मुश्किलों से सुरक्षा देता। 
समय बीतता गया। चारों छोटे मुर्गे बड़े हो गए। बड़ा मुर्गा अब बूढ़ा हो चला था। चार मुर्गे में एक ज्यादा जागरूक हो गया, बात बात पर हुकुम चलाने लगा था, बड़ा मुर्गा उसे समझता और सभी को मिल कर रहने की सलाह देता। 
उस बड़े होते मुर्गे को उसकी बातें अच्छी न लगती थी। उसने अन्य तीन मुर्गो को भड़काना शुरू कर दिया। उनको वो बड़े बड़े सपने दिखाने लगा। वो भी उसकी बातों में आ ही गए। अब वो मुखिया बन गया। 
अब उन चारों ने उस बड़े मुर्गे को धमकाना शुरू कर दिया। वो बड़ा मुर्गा अब अकेला सा हो गया।
अब वो उस दड़वे में अकेला हो गया। कोने में अकेला गुमसुम रहता है। चुपचाप सोचता है गलती कहाँ हो गई।

ठंड काफी हो गई है

0 COMMENTS
शाम ऑफिस से निकला तो घर के लिए ओल्ड बस स्टेंड से बस ली। सीट की आपाधापी में किसी तरह से सीट मिल ही गई।
सीट पर एक भाई साहब बैठे थे मुझे चुपचाप देख उसने बातों का सिलसिला शुरू कर दिया।

- बर्फ कुछ कम ही पड़ी है
- जी
- पहले वर्षा होनी चाहिए थी बगीचे के लिए अच्छी रहती है।
- जी
- राजा साहब इस बार चुनाव लड़ेंगे क्या?
- क्या पता
- जय राम जी अच्छे आदमी है
- जी 
- विक्रमादित्य अब अच्छा भाषण देने लगे है
- जी
- तरक्की तो अनुराग ने की है
- जी
- आपका गांव कोन सा है
-- जी .... है
- वहां के तेज बन्दे है
- पता नहीं 
- यहां कहा रहते हो
- जी .... में रहता हूँ।
- अकेले रहते हो
- नहीं बच्चें साथ रहते है
-  पढ़ते होंगे
- जी
- किस डिपार्टमेंट में काम करते हो
- शिक्षा विभाग में 
- मास्टरों की सैलरी तो बहुत अच्छी है। आपकी कितनी है
- जी, गुजारा चल रहा है
- टेक्स कितना काटते हो
- जी ... हर महीने 
- आप कहाँ काम करते हैं, मैनें पूछा
- मैं सेटलमेंट में था। 
- जी
- ठंड काफी हो गई है
- जी
- रम लगाते हो 
- ढली वाले तैयार हो जाओ कंडक्टर की आवाज़ सुनाई दी
- मेरा स्टेशन आ गया था। उस व्यक्ति की बातों के सिलसिले का मूल तत्व मुझे समझ आ गया था।

घर ढूंढ़ता है कोई

0 COMMENTS
इस शहर में घर ढूंढता है कोई,
क्या यहां अपना रहता है कोई।

उफ ये दौड़ , ये भागमभाग,
चुपचाप सा बहता है कोई।

बदहवास ज़िंदगी का सबब है क्या,
अपना ही पता यहां पूछता है कोई। 

एक दूसरे की साँसों से बंधे है हम,
फिर भी जुदा जुदा सा रहता है कोई। 

चेहरे तो हैं सभी जाने पहचाने, 
फिर भी अपना लापता है कोई। 

पूछ रहा हूं मैं उससे उसी का नाम,
मुझे ही विक्षिप्त कहता है कोई। 

जारी....

शब्द परिचित से

0 COMMENTS
अभी अभी
उतरे हैं कुछ शब्द
अंधेरी पथरीली 
सीढ़ियों से, 
शब्द
कुछ परिचित 
कुछ जाने पहचाने, 
एकाएक खो गए
कहीं अंधकार में,
कैसे ढूंढूगा
ओझल शब्द
जो लगते थे
मेरे अपने...

2

0 COMMENTS
भुला दिए सब गिले शिकवे तूने
दिल में एक दो मलाल रहने दे

लेखा जोखा



आपके पधारने के लियें धन्यवाद Free Hit Counters

 
? ! ? ! INDIBLOGGER ! ? ! ? ! ? ! ? ! ? हिंदी टिप्स ! हिमधारा ! ऐसी वाणी बोलिए ! ? ! ? ! ब्लोगर्स ट्रिक्स !

© : आधारशिला ! THEME: Revolution Two Church theme BY : Brian Gardner Blog Skins ! POWERED BY : blogger