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Tuesday, February 14

कुमारसैन की पल्‍लवी जाऐगी जापान

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राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक पाठशाला कुमारसैन शिमला की छात्रा पल्‍लवी वर्मा का चयन जापान यात्रा के लिए हुआ है। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय The Japan East Asia Network of Exchange for Students and Youths (JENESYS) के तहत यह चयन हुआ  है । इस योजना के तहत पुरे देश से लगभग पौन तीन सो छात्र छात्राओं का चयन हुआ है। शिमला जिला से इस यात्रा के लिए 14 छात्रों का चयन हुआ है। पाठशाला के प्राचार्य कमलजीत सिंह ठाकुर ने पल्‍लवी को इस चयन के लिए बधाई देते हुए इसे  स्‍कूल और क्षेत्र के लिए गर्व की बात बताया है। जमा एक कक्षा में विज्ञान संकाय की छात्रा पल्‍लवी कुमारसेन के साथ लगते गांव बई से बलबीर सिंह वर्मा  की पुत्री है।  पल्‍लवी ने इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता और अध्‍यापकों को दिया है। पल्‍लवी आरम्‍भ से ही होनहार छात्रा रही है। दसवीं की हिमाचल प्रदेश स्‍कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में भी पल्‍लवी ने नब्‍बे प्रतिशत से उपर अंक प्राप्‍त किये है। 

Wednesday, February 8

अश्विनी रमेश को हिमोत्‍कर्ष हिमाचलश्री पुरस्‍कार

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साहित्‍कार और प्रशासनिक अधिकारी अश्विनी रमेश को हिमोत्‍कर्ष साहित्‍य संस्‍कृति एवं जनकल्‍याण परिषद हिमाचल प्रदेश ने हिमोत्‍कर्ष हिमाचलश्री पुरस्‍कार 2011-12 से सम्‍मानित किया है। रमेश साहित्‍य में विशेष रूचि रखते है। अश्विनी रमेश का एक काव्‍य संग्रह ज़मीन से जुड़े आदमी का दर्द  भी प्रकाशित हो चु का है जिसे साहित्‍य जगत में बेहद सराहा गया है।  अश्विनी रमेश का जन्‍म 25 मई 1961 को जिला शिमला के ठियोग में गांव कुन्‍दली में हुआ। अश्विनी रमेश हिमाचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय से संस्‍कृत में एम0 फिल0 और अंग्रेजी में एम0ए0 की उपाधि प्राप्‍त है। अश्विनी रमेश की रचनायें विभिन्‍न पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ आकाशवाणी शिमला से प्रसारित भी हो  चुकी है। अश्विनी रमेश हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा के अधिकारी है और ठियोग की साहित्यिक संस्‍था सर्जक से भी जुड़े है। अन्‍तरजाल पर उनके महफिले शायरी  और Poetry--A Blend of Real, Natural and the Mystic   उपलब्‍ध है। अश्विनी रमेश को अनेकानेक बधाई। 


Monday, January 30

गांधी जी

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गांधी जी श्रीमद्भागवत गीता को अपना मार्गदर्शक धर्मग्रंथ मानते थे। एक बार किसी ने उनसे पूछा, 'गीता की किस बात ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया है?' गांधी जी ने जवाब दिया, ' वैसे तो गीता के कई उपदेश उल्लेखनीय हैं, पर निष्काम कर्म करते रहने और सत्य-न्याय पर अटल रहने के उपदेश को वह सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं। इसके साथ ही आवश्यकता से अधिक संपत्ति संचय करना भी अधर्म है।'  एक बार गांधी जी का एक परिचित धनाढ्य उनसे मिलने पहुंचा। उसने कहा, 'जमाना बेईमानों का है। आप तो जानते ही हैं कि मैंने अमुक नगर में लाखों रुपये खर्च कर धर्मशाला का निर्माण कराया था। अब गुटबाजों ने मुझे ही प्रबंध समिति से हटा दिया है। क्या न्यायालय में मामला दर्ज कराना उचित होगा?' गांधी जी ने कहा, 'तुमने धर्मशाला धर्मार्थ बनवाई थी या उसे व्यक्तिगत संपत्ति बनाए रखने के लोभ में?   असली धर्म तो वह होता है, जो बिना लाभ की इच्छा के किया जाता है। तुम अभी तक नाम व प्रसिद्धि का लालच नहीं त्याग पाए हो। इसलिए तुम पद से हटाए जाने से दुखी हो।' यह सुनकर उस व्यक्ति ने संकल्प लिया कि वह आगे किसी भी पद अथवा नाम के विवाद में नहीं पड़ेगा।  गांधी जी लोगों से स्वाधीनता आंदोलन व हरिजन कल्याण के कार्यों के लिए चंदा लिया करते थे। वह उसका एक पैसा भी अपने ऊपर खर्च नहीं करते थे। उनका मानना था कि दूसरों के खून-पसीने के पैसे का अपने स्वार्थ के लिए दुरुपयोग करना अधर्म है।

साभार अमर उजाला 

Thursday, January 26

विजय शर्मा को पदमश्री

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हिमाचल को पेंटिंग्स में पदमश्री अवार्ड से नवाजा गया है और यह पुरस्कार चंबा के विख्यात चित्रकार 50 वर्षीय भाषा अधिकारी विजय शर्मा को मिला है। श्री शर्मा जो कि भूरि सिंह संग्रहालय में कार्यरत हैं। इससे पहले विजय शर्मा को वर्ष 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति श्री बेंकट रमन ने राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित किया था। विजय शर्मा अब तक 15 हजार से भी ज्यादा ऑयल पेंटिग्स बना चुके हैं। 35 वर्षों से वह इस हुनर को पाले हुए हैं। उन्हें यह हुनर शौकिया ही मिला है, उन्हें चंबा संग्रहालय से ही पुराने कलाकारों की पेटिंग्स को देखकर प्रेरणा मिली है। उनकी पेंटिग कांगड़ा, बसौली पर आधारित है। राधा-कृष्ण रागमाला उनकी अन्य कृतियां हैं। विजय शर्मा इस पुरस्कार को पाकर खुश हैं। अपने साथ उन सभी कलाकारों को इस खुशी में शामिल करना चाहते हैं, जो प्रदेश में गुमनाम जिंदगी जी रहे हैं। उनमें हुनर तो है मगर उनकी अब तक भी पहचान नहीं हो पाई है। विजय शर्मा जिला के ऐसे दूसरे व्यक्ति हैं, जिन्हें पदमश्री से नवाजा गया है। इससे पहले बिजली बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय कैलाश महाजन भी इस अवार्ड को हासिल कर चुके हैं।

गणतंत्र दिवस की शुभकानायें

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गणतंत्र दिवस  26 जनवरी को मनाया जाता है, 26 जनवरी1950 को भारत का संविधान लागू हुआ| बस तभी से देश गणतंत्र हुआ और उसी उपलक्ष मे गणतंत्र दिवस हर वर्ष मनाया जाता है| जनवरी 26, 1950 भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। भारत का संविधान, इसी दिन अस्तित्व मे आया। इस दिन भारत एक सम्पूर्ण गणतान्त्रिक देश बन गया. 26 जनवरी की एैतिहासिक महत्‍व भी है। सन 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन में  प्रस्ताव पारित कर  घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी, 1930 तक भारत को उपनिवेश का पद नहीं प्रदान करेगी तो भारत अपने को पूर्ण स्वतंत्र घोषित कर देगा। 26 जनवरी, 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। तदनंतर स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए  गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई

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