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रविवार, नवंबर 12

चाय आज मीठी लगी

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#अधूरे_पन्ने

बेहद प्रसन्‍नता होती है जब कोई ऐसा मित्र मिलता जिसने अपने कार्य से प्रेरणादायक काम किया हो। पिछले कल दूसरा शनिवार होने के कारण कार्यालय से अवकाश था। फोन आया गुरू जी आपसे मिलना है और आपके साथ चाए पीनी है। फोन बहुत पुराने मित्र Chet Ram Azad  जी का था। आज़ाद जी ठियोग से है और मेहनती व्‍यक्ति है। मैं 1996 में ठियोग में कार्यरत था। आज़ाद जी उस समय मात्र मैट्रिक ही थे जो 1986 में की थी और पढ़ने की इच्‍छा रखते थे। लेकिन आगे नहीं पढ़ पाए । एक दिन उन्‍होने अपने मन की बात मुझ से कह दी और मैंने भी उनका जमा दो का फॉर्म भरवा दिया। परिणाम आया तो अंग्रेजी विषय में कम्‍पार्टमेंट आ गई। आजाद जी को प्रोत्‍साहित किया और उनकी जमा दो परीक्षा भी हो गई। आजाद जी इससे बेहद उत्‍साहित हो गएऔर कहने लगे अब तो ग्रेजुऐशन भी करनी है। इग्‍नू का फॉर्म भरवा दिया। आजाद जी की अध्‍ययन यात्रा चलती रही । मैं सन 2000 में ठियोग से कुमारसैन के लिए स्‍थानान्‍तरित होगया।
आजाद जी ने इग्‍नू से स्‍नातक कर लिया। वे अपनी प्रगति की सूचना मुझे देते रहे । आजाद जी की पढ़ने की ऐसी ललक पैदा हुई की इग्‍नू से एक दो डिप्‍लोमें भी कर लिए।
आजाद जी एक सहयोग नाम से एक सस्‍था का संचालन भी करते है और इस क्षेत्र में जब आते है तो मिलकर ही जाते है। शनिवार को उन्‍होने रूक कर चाए पीने की इच्‍छा व्‍यक्‍त की तो अच्‍छा लगा।
आजाद जी आए और गप्‍प शप्‍प होने लगी । बातचीत में उन्‍होने कहा गुरूजी चाए तो बहाना है दरअसल मैं आपको कुछ दिखाना चाहता हूं। मैंने कहा, हां हां दिखाओ। आजाद जी ने एक परिचय कार्ड मेरे हाथों में दिया। गौर से देखा तो वह बार को‍ंसिल ठियोग का परिचय पत्र था। आजाद जी ने विधि स्‍नातक की उप‍ाधि प्राप्‍त कर ली थ्‍ाी और पंजीकरण भी करवा लिया था।
आजाद जी मुझे आभार देते हुए कह रहे थे आपने जो रास्‍ता दिखाया उससे ही ये सम्‍भव हो पाया। आभार तो आजाद जी का जिन्‍होने मुझे याद रखा मैं तो मात्र माध्‍यम बना मेहनत तो उनकी थी।
सच मानिए चाए आज मुझे बेहद मिठी लग रही थी .......

गुरुवार, अक्तूबर 19

स्मृतियां

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दबे पांव
कुछ स्मृतियां
आएगी सामने
छम से रौशनी लिए ,
ढूंढेंगे शब्द, अर्थ 
और शब्दावली,
फिर हो जाएगी गुम
रौशनी स्मृतियां 
तुरंत 
कहीं अंधकार में 
प्रश्न अनेक छोड़ ...

मंगलवार, अक्तूबर 17

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व्यापार। लघुकथा

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- दस और पचास का स्टाम्प पेपर तो दीजिये।
- दस और पचास के तो नहीं है बीस और सौ के ही आ रहे है।
- जरूरत तो दस और बीस की ही थी। इसमें तो रुपये ज्यादा लग जाएंगे।
- जनाब यही है। इस बाहने दो पैसे हमारे भी बन जाएंगे। 
- अरे शर्मा जी, "ईश्वर से तो डरिये अगले जन्म में लंगड़ी खच्चर बनोंगे"।
आस पास के लोग ठहाके लगा रहे थे और आस्था हवा में बिखरी पड़ी थी।

सोमवार, अक्तूबर 16

गांव

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गांव,
नहीं रहा है गाँव अब,
गांव बन गया है
षड्यंत्रकारियों,
चोरों और उच्चकों का गढ़,
संवेदना खत्म हो गई है
भर गई कड़वाहट
रिश्तों में है शून्यता,
सुरक्षित नहीं रहा है
गाँव अब
रास्ते , पगडंडियां और गालियां
हो गई है असुरक्षित,
ना जाने
कहाँ से निकल आये कोई
और
कत्ल कर दे
सम्मान, संवेदना और सहृयता का,
नहीं रहा है गांव
अब गाँव ।

मंगलवार, सितंबर 5

अंतर तो बताइए

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धे घोड़े में अंतर ज़रा समझाइये जनाब, 

नियम उप नियम क्या है बताइये जनाब।

बन्द कमरों में योजनाएं बनानी है आसान ,

कभी यथार्थ के धरातल पर भी आइये जनाब।

हमी से ये बाग बागीचे और शानो शौकत,

दो मिट्ठे बोल और गले तो लगाइये जनाब।

हर इल्ज़ाम हमी पर हम सब चोर है क्या,

शक अगर है इतना तो थाना बैठाइए जनाब।

टूट जाये दिल गुम जाए अरमान तुमको क्या,

ग्राहक बहुत है आप दुकान सजाइये जनाब।

शासक जनता का फर्क समझता है  विक्षिप्त,

प्रजा है आपकी इतना मत हड़काइये जनाब 

गुरुवार, फ़रवरी 2

सुंदरता

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उसकी बातें उसकी सुंदरता की तरह ही आकर्षक होती थी। कोई भी उससे मिलता तो उसका मुरीद हो जाता। मैं भी उसकी उसकी बातों से बेहद प्रभावित रहा।
कार्यालय में सभी स्टाफ सदस्य वार्षिक उत्सव पर विचार विमर्श कर रहे थे कि सेवादार ने सूचना दी कि गांव से उसके सास ससुर मिलने आये है। ।
मैंने उससे आग्रह किया कि आप सास ससुर से मिलने जा सकती हैं। उसने बड़े ही रूखे स्वर में तुरंत  इनकार कर दिया और कहने लगी उनका लड़का मिल लेगा । उनके शरीर से तो गांव वाली गंध आती है।
मैं हैरानी से उसका चेहरा ताकता रह गया। उसकी सुंदरता अब मुझे कुरूपता नज़र आ रही थी।

लेखा जोखा



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